
सप्त-स्वर द्वारा भारत नाट्यम शास्त्रीय नृत्य परंपरा के कानपूर में पचास वर्ष के उपलक्ष्य में नृत्य एवं संगीत का दो दिवसीय आयोजन दिनांक २७ व् २८ मई को कानपूर के मोतीझील स्थित लाजपत भवन प्रेक्षागार में किया गया है। कार्य क्रम का पहला दिन " निवेद्यतम सौरभीयम " अर्थात दक्षिण भारतीय शाश्त्रीय नृत्य - भरत नाट्यम के कानपूर में प्रतिस्थापक गुरु श्री युत श्री धरन नायर को श्रद्धा सुमन समर्पित करते हुए, उनकी परंपरा का मनोहारी नैवेद्य कानपूर के दर्शकों को वितरित करना। इस कार्य क्रम में निष्ठा शर्मा एवं उनकी शिष्याएं भरत नाट्यम की बहु रंगी कलाओं के साथ अलग अलग एवं समूह में नृत्य प्रस्तुत करेंगी ।
यहाँ ये बताना ज़रूरी है कि निष्ठा शर्मा गुरु श्रीयुत श्री धरन नायर की शिष्या हैं । वर्ष १९५१ में श्री धरन जी कानपूर में आये, वर्ष 1956 में कुछ लोगों ने उनसे भरत नाट्यम का प्रशिक्षण भी लिया किन्तु एक संस्थागत नियमित भरत नाट्यम का प्रशिक्षण कार्यक्रम उनके द्वारा १९६० से प्रारंभ किया गया जो अनवरत अभी तक सुव्यवस्थित ढंग से चलाया जारहा है। पहले नृत्य प्रशिक्षण स्वयं गुरु जी (श्री धरन नायर ) द्वारा ही दिया जाता था। लेकिन उनके कानपूर से लखनऊ प्रस्थान करने के उपरान्त ये कार्य उनकी सुयोग्य शिष्या निष्ठा द्वारा पूरे समर्पण के साथ किया जा रहा है। निष्ठा ने गुरु श्रीयुत श्री धरन नायर के सानिध्य में भारत नाट्यम की बारीकियों तथा गति मुद्रा आदि का सफल प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने गुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया गुरु श्रीधरन नायर ने उन्हें कानपूर में नृत्य प्रशिक्षण के हेतु अपना उत्तराधिकारी घोषित करते हुए इस कार्य को निरंतर चलाये रखने के लिए परम्परा कमान सौंप दी । निष्ठा बहुमुखी प्रतिभा कि धनी हैं । भरत नाट्यम में अलंकार की उपाधि अर्जित करने के पश्चात उन्होंने संगीत (गायन) में परास्नातक कि उपाधि ली तदनंतर विश्ववद्यालय प्रवक्ता हेतु निर्धारित नेट में भी सफलता प्राप्त की निष्ठा ने संगीत में पी एच.डी हेतु अपनी थीसिस विश्ववद्यालय में प्रस्तुत कर दी है। नृत्य एवं संगीत के साथ कानपूर के रंगमंच पर भी अपना उल्लेखनीय योगदान दिया है । उत्तर भारत कि सुविख्यात नाट्य संस्था दर्पण के सभी संगीतमय नाट्य प्रस्तुतियों में कोरिओग्राफी एवं नृत्य निर्देशन निष्ठा द्वारा ही किया गया है। निष्ठा एक संवेदन शील अभिनेत्री, नृत्य निर्देशिका, गायिका, नृत्य एवं गायन प्रशिक्षिका के साथ साथ कानपूर के सांस्कृतिक समूह की विशिष्ट एवं समर्पित कार्य कर्त्री हैं । २७ मई का होने वाला नृत्य आयोजन एवं उनके निर्देशन में नृत्य प्रस्तुतीकरण कानपूर के नगर वासियों के लिए विशेष आकर्षण होगा।
दिनांक २८ मई २०१० को सुविख्यात गायिका और कवियत्री सीमा अनिल सहगल का संगीतमय कार्यक्रम होगा । कदाचित सीमा सहगल कानपूर में पहली बार आ रही हैं । लेकिन उनकी गायकी लाजवाब है। वे अंतर्राष्ट्रीय ख्याति कि गायिका हैं। उनकी एल्बम सरहद बहुत ही लोकप्रिय एल्बमों में से है। उन्हें पीस सिंगर आफ इंडिया, कश्मीर कि कोकिला आदि विशेषणों से नवाज़ा जा चूका है। दिनांक २८ मई २०१० को सीमा सहगल की गायकी से सजी संवरी ग़ज़ल संध्या निश्चय ही एक अविस्मरनीय शाम होगी। साम्प्रदायिक सौह्राद के लिए गीतों कोप्रस्तुत करने कि सीमा सहगल कि ख्याति कानपुर में कितना सद्भाव जनमानस तक पंहुचा पाएंगी ये ये उनके कार्य क्रम कि कानपूर वासियों कि सहज प्रतिक्रिया स्वतः बता देगी। आप अगर इस ब्लॉग को पढ़ें तो दिनांक २७ व् २८ मई को शाम ७-३० बजे से नृत्य और ग़ज़ल गायकी से सजी लाजपत भवन मोतीझील में आयोजित संध्या में अवश्य आयें।