Friday, January 9, 2009

प्रार्थना में .....


प्रार्थना में ....
विगत के अज्ञात कर्मों की झलक इस भाँति उभरी,
जिस तरह से,शांत जल में डाल दे कोई कंकडी।
एक कोलाहल था कि जिसमे थी तरंगित यातना,
याकि मन स्वछन्द विगलित कर्म की थी वासना।
भाव द्रष्टाका न मन में ,
प्रार्थना निर्भाव पल में,
मैं अकिंचन,व्यर्थ चिंतन,
अब ना था ये भाव अर्चन।
मूढ़ता के मध्य खुद पर खीजता,
शांत होने का न पथ भी सूझता ।
आह! मन संताप ,कैसे करू पश्चाताप!
क्या प्रभु अज्ञानता भी है हमारा पाप!
क्यां करू मैं माँ तुझे कुछ वो समर्पण दे न पाया,
मूढ़ता अविवेक कलुषित दुर्गुणों की पड़ी छाया।
और पिता सर्वस्व पालक भी रहे वंचित,
कर ना पाया मैं कभी कुछ श्रेष्ठ गुण अर्जित।
प्रार्थना में नाथ जब तुमको कहा ' पितु मात
'पितु मात की आवृत्ति से तत्क्षण लगा आघात।
मैं तो रहा हूँ सर्वथा उस भाव से अनजान,
जिसको सुना करता था कि माता पिता भगवान।
ये हमारी वेदना प्रभु ध्यान में जो मुखर होती,
भूत कि अनुभूति प्रायः ध्यान में ही प्रखर होती।
और अब मैं लड़ रहा हूँ - स्वयं से,
इस आघात से और अंतर्द्वंद से ;
क्या करू अब कहाँ जाऊँ किससे कहूँ ,
या लिए संताप मैं खुद से सदा लड़ता रहूँ?
है नहीं मुझमे निराशा इसलिए तो लड़ रहा हूँ,
है तेरी सामर्थ्य फिर क्यों मैं अकेला पड रहा हूँ
माता पिता की ये कमी ही अब मुझे भरमा रही है ,
कर नहीं पाया! के अंतर्द्वंद में ही आयु बीती जा रही है।
हे मेरे प्रभु ! तुम हो दयालू ,तुम पर मेरी है आस,
कठिन पथ है चल रहा लेकर तेरा विश्वास!
बस यही विश्वास ... एक ही विश्वास.. मेरी प्रार्थना में .

Wednesday, January 7, 2009

मासूम प्यार के नए रंग

२२वी शताब्दी के इस दौर में भी हमारे देश में बाल विवाह की घटनाएँ अभी भी आम हैं लेकिन आज यहाँ हम जिस बाल विवाह की चर्चा करने जा रहे हैं वो पाश्चात्य देशों की विकसित सभ्यता में अग्रणी देश की अत्यन्त रोचक घटना है .इस बाल विवाह के प्रस्ताव में और हमारे मुल्क में पुरातन पंथी रुढी ग्रस्त बाल विवाह में ज़मीन आसमान का अन्तर है .ये बौद्धिक विकास और सांस्कृतिक सम्मुन्नति की पराकाष्ठा का प्रतीक है .और वो हमारी दकियानूसी और अज्ञानता की निशानी । इस तुलना का यहाँ कोई आधार व् औचित्य भी नहीं । मूल बात ये है कि जर्मनी लन्गेनहैगेन के पास के एक टाऊन में एक रोचक घटना घटी । वहां के छः वर्ष के मिका , पाँच वर्ष की एन्ने लेना से नए वर्ष के उत्सव आयोजन में पहली बार मिले और उन्हें एक दूसरे सेप्यार हो गया .बात यहीं तक सीमित नहीं रही नए वर्ष कि शुरुआत के साथ ही उन दोनों ने तय कर लिया कि उन्हें शादी करनी है .शादी करने के लिए उन्हें लगा कि जर्मनी ठीक नहीं रहेगा क्योंकि इस वक्त वहां कडाके की ठंडक पड़ रही है इसलिए तुंरत साउथ अफ्रीका जाने का प्लान उनलोगों ने बनाडाला.शादी में एक गवाह के लिए अपने साथ ले चलना भी उन्होंने ज़रूरी समझा इसके लिए एन्ने लीना कि सात साल कि बहन को तैयार किया गया .इतनी साड़ी योजना बनाकर और साउथ अफ्रीका जाने के लिए कैरी बैग में बाथिंग सूट सन ग्लास्सेस और लिलो के साथ उस समय निकल पड़े जब घर के सारे लोग नव वर्ष मनाने के बाद आराम कि नींद सो रहे थे .घर से निकल कर एक किलोमीटर पैदल चलने के बाद ये लोग एक ट्राम में सवार हुए और हनोवर रेलवे स्टेशन पहुंच गए .वहां से इन्हें एअरपोर्ट के लिए ट्रेन मिलनी थी जिसका ये तीनों लोग इंतज़ार कर रहेथे तभी वहां तैनात पुलिस कर्मी ने इन मासूम बच्चों को बैठे देखा तो उसे कुछ गड़बड़ लगा उसने इनसे पूछ ताछ कि लेकिन कोई कुछ भी नही बोला ,पुलिस कर्मी हैरान हुआ फ़िर उसने प्यार से इन बच्चों को पुलिस स्टेशन घमाने का प्रलोभन दिया और ये भी बताया कि ट्रेन में बिना टिकेट जाने को नहीं मिलेगा इसलिए बेहतर यही होगा कि उसके साथ पुलिस स्टेशन ही घूम लोगे .बच्चों को पुलिस कर्मी का यह प्रस्ताव अच्छा लगा और वे तीनों उसके साथ पुलिस स्टेशन घूमने चले गए इसी बीच प्यार से पूछे जाने पर इन लोगों ने अपना सारी कार्य योजना पुलस कर्मी को बता दी कि वो शादी करने साउथ अफ्रीका जा रहे हैं । खैर पुलिस कर्मी ने अपना फ़र्ज़ अदा किया और उन बच्चों को उनके माता पिता के हवाले कर दिया । एन्ने लेना और मिका से जब पूछ गया कि अब क्या करोगे तो उसने जवाब दिया कि जल्दी ही वह लोग शादी करेंगे उनके हौसले बुलंद हैं । है न मजेदार घटना ! मासूम प्यार का नया रंग .

एक उड़ान बचपन की

नए वर्ष में देखा मिले प्यार हुआ और शादी का प्रस्ताव रखा और शादी करने निकल पड़े जर्मनी से साउथ अफ्रीका के लिए ...शायद कोई ख़ास बात नहीं क्योंकि हर कोई किसी किसी से प्यार करता है शादी रचाता है तो ऐसा ख़ास क्या ? लेकिन मामला जब दो मासूम अध् खिली कलियों का हो तो हर बात मजेदार हो जाती है .जी हाँ ,केवल पाँच साल की उम्र में प्यार हो जाने और शादी करने का फ़ैसला किसी घर के बड़े बूढों का नहीं किरूढियों में फंसे किसी अति पिछडे समाज की मजबूर मान्यताओं के कारण ऐसा किया जा रहा होयहाँ मामला दिल का है और ये दिलवाले हैं भी बड़े प्यारे और मासूम .जर्मनी के लन्गेनहगेन के पास एक टाऊन में नए वर्ष का उत्सव दो परिवारों ने साथ साथ मिल कर मनाया .परिवार में पाँच साल कि एन्ने लेना और छः साल का मिका पहली बार एक दूसरे से मिले .मिका को एन्ने ने देखा तो उसे लगा कि यही वह है जिसे वह दिलोजान से प्यार करता है .बस फ़िर क्याथा ,दोनों ने प्यार का इज़हार किया और शादी करने की योजना बना डाली .इनकी उम्र के हिसाब से इनकी सोच काफी परिपक्व

बाल विवाह की एक पेशकश बचपन की