Sunday, February 28, 2010

Lok Prasang: भूमि विकास बैंक के सृजनकर्त्ता का महाप्रयाण

Lok Prasang: भूमि विकास बैंक के सृजनकर्त्ता का महाप्रयाण

भूमि विकास बैंक के सृजनकर्त्ता का महाप्रयाण

वर्ष १९५५-५६ में पी सी एफ प्रेस में प्रतिनियुक्ति पर कार्य कर रहे सहकारिता के सहकारी निरीक्षक संवर्ग के श्री शिव नारायण त्रिपाठी जो एक धर्म भीरु समर्पित अधिकारी थे , को कदाचित इस बात का अहसास नहीं होगा की वे प्रदेश के सहकारिता आन्दोलन में विकास का एक नया अध्याय रचाने जा रहे हैं .सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण प्रगति का शिलान्यास अर्थात प्रदेश में किसानो के कल्याण की एक ऐसी सुदृढ़ इकाई जो ग्रामीण बैंकिंग का आधार बनी और सहकारिता में किसानो के लिए दीर्घ कालीन वित्त पोषण के माध्यम से सहकारी आन्दोलन से रूबरू होने का सुनहरा अवसर - क्योंकि देश में आजादी से पहले से स्थापित सहकारी आन्दोलन की नीव के रूप में अल्पकालिक और मध्यकालिक साख समितियां और सहकारी बैंक किसानो को न तो ऋण ग्रस्तता से बचाने में ही सफल थे और न ही ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था को सही ढंग से चला पा रहे थे । भारतीय किसान की दुर्दशा बाद से बदतर थी .राजनैतिक आज़ादी तो मिल गयी लेकिन देश का ९० प्रतिशत भाग जो खेती किसानी से पोषित था देश की बदहाली की कहानी बयान कर रहा था। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा गठित ग्रामीण साख सर्वेक्षण समिति की रिपोर्ट में सहकारी आन्दोलन के असफल होने की बात तो स्वीकार की लेकिन साथ में यह भी सिफारिश कर डाली कीगाँव की दश सुधारने के लिए सहकारी आन्दोलन ही एक मात्र विल्कल्प है और इसे सफल होना ही चाहिए। द्वितीय पञ्च वर्षीय योजना में सहकारिता को विकास योजना का हिस्सा मानते हुए किसानों के हित में सहकारी दीर्घ कालीन ऋण सुविधा हेतु भूमि बंधक बैंक की स्थापना को अनिवार्य मानते हुए तत्काल इसके प्रारम्भ के निर्देश भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा दिए गए और इन्हीं सिफारिशों के अंतर्गत श्री शिव नारायण त्रिपाठी को दीर्घ कालीन ऋण व्यवस्था के सघन प्रशिक्षण हेतु सहकारिता विभाग द्वारा नामित किया गया .श्री त्रिपाठी द्वारा इस प्रशिक्षण के उपरान्त भी उत्तर प्रदेश शाशन तथा सहकारिता विभाग प्रदेश में भूमि बंधक बैंक की स्थापना के प्रति उदासीन से रहे अंततः पुनः भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा इस दिशा में तुरत कार्यवाही के निर्देश के साथ ये चेतावनी की यदि दीर्घ कालिक ऋण व्यवस्था हेतु एक अलग संस्था की सहकारिता विभाग द्वारा स्थापना तुरंत नहीं की जाती है तो भारतीय रिजर्व बैंक अल्प कालिक वित्त हेतु डी जा रही सहायता तुरंत बंद कर देगा और तदनंतर आनन् फानन भूमि बंधक बैंक की स्थापना की समस्त औपचारिकताएं पूर्ण करते हुए बिना कीसि समुचित आकार एवं कार्य प्रणाली निर्धारित किये १२ मार्च १९५९ को बैंक की स्थापना की घोषणा कर डी गयी और श्री त्रिपाठी इस बैंक के महाप्रबंधक के रूप में निर्माण संरचना में जुट गए.श्री त्रिपठी जी ने यह महसूस किया की भूमि बंधक बैंक नाम इस की कार्य प्रणाली से अलग सा लगता है अतः उन्होंने इसे भूमि बंधक बैंक से भूमि विकास बैंक नाम दिए जाने का सुझाव प्रस्तुत किया किन्तु शाशन स्टार पर इस सुझाव पर शुरुआत में पूरी उदासीनता दिखाई गयी क्योंकि अन्य प्रदेशों में तब भूमि बंधक बैंक नाम सामान्य रूप से अपनाया जा चूका था । श्री त्रिपाठी जी ने पुनः एक बार सभी राज्यों के भूमि बंधक बैंकों का नाम भूमि विकास बैंक किये जाने का प्रस्स्ताव भारतीय रिजर्व बैंक तथा शाशन को न केवल प्रस्तावित किया वरन इस नाम की उपादेयता तथ औचित्य को स्पष्ट करते हुए इसे लागू कराने के लिए लगे रहे और अंततः वे नाम परिवर्तित कराने के इस अभ्याँ में सफल रहे जिससे न केवल उत्तर प्रदेश वरन पूरे देश में कार्य रत सभी भूमि बंधक बैंक - भूमि विकास बैंक के नाम से संशोधित कर दिए गए । ये श्री त्रिपाठी जी का प्रथम उल्लेखनीय योगदान एवं उपलब्धि थी । इसके बाद बैंक के एकात्मक स्वरुप तथा कार्यप्रणाली एवं व्यवसाय संवर्धन हेतु उन्होंने पूर्ण समर्पण भाव से बैंक को उत्तरोत्तर आगे बढाने में कोई कस्सर नहीं छोड़ी उनकी निष्ठां एवं बैंक के प्रति समर्पण का ये परिणाम था की भूमि विकास बैंक और श्री त्रिपाठी एक दूसरे के पर्याय कहलाते थे । पिछले महीने मैं उनसे बैंक के पचास साल पूरे होने के अवसर पर बैंक के वर्तमान प्रबंध निदेशक महोदय ( श्री नवल किशोर ) द्वारा बैंक के प्रारंभ से अब तक के विकास के इतिहास पर आधारित वृत्त चित्र निर्माण कराये जाने के दिए गए दायित्व के सिलसिले में श्री त्रिपाठी जी से मिलने फैजाबाद गया था जहाँ उनसे बैंक के बारे में काफी लम्बी बात हुयी.वस्तुतः बैंक के नाम परिवर्तित कर विकास का जो मिसन उन्होंने स्थापित किया वह बैंक की आत्मा बन गया .लोक मंगल में अपना जीवन लुटाने वाले समय की आग में ताप कर खरा सोना बन जाते हैं.आदरणीय श्री त्रिपाठी जी ने बैंक के महाप्रबंधक पद पर कार्य करते हुए अपने कर्मठ एवं सक्रीय योगदान की ज्वलंत मिसाल से पूरे देश में सहकारिता के विकास को एक सकारात्मक रूप प्रदान किया । बैंक की स्थापना के पूर्व से लेकर वर्ष १९६८ तक आप बैंक के कर्ण धार रहे .अपने कार्यकाल में आपने बैंक को स्वाबलंबी बनाने के लिए सुदृढ़ नीतियाएवं कार्यशैली अपनाई जो बैंक के साथ साथ किसानों के लिए हितकारी थीं । सादा जीवन उच्च विचार के प्रतीक श्री त्रिपाठी जी किसानों एवं गाँव की उन्नति के लिए बैंक को और अधिक बेहतर बनाने के लिए नित नयी कार्य योजनाओं में तल्लीन रहते.आपने न्यूनतम ब्याज दर पर किसानों को वित्तीय सुविधा प्रदान करा कर बैंक की लोकप्रयता में चार चाँद लगाए.वे मात्र रचनात्मक कार्यकर्त्ता ही नहीं बल्कि लोक जीवन से जुड़े सपूत थे .भमि विकास बैंक एवं सहकारिता के अतिरिक्त आप ग्रामीण विकास की अनेक संस्थाओं के नीव के पत्थर रहे .आपने यूं पी अग्रो तथा पूर्वांचल विकास निगम की स्थापना में अपना बहुमूल्य योगदान दिया .सुल्तानपुर जिले के ग्रामम देवरी तारणपट्टी पोस्ट परसा ददवा में तीन जनवरी १९१९ को जन्में श्री त्रिपाठी जी जीवन भर सच्चाई, ईमानदारी एवं कर्मठता की मिसाल बने रहे । उन्होंने कभी किसी स्वार्थ के लिए अपने आदर्शों एवं जीवन मूल्यों पर आंच नहीं आने दी । आत्मा प्रचार से दूर , सर्व सुलभ व्यक्तित्व ,वैचारिक सम्पदा के धनी आदरणीय श्री त्रिपाठी जी की कथनी करनी में एकरूपता जीवन पर्यंत रही । विपरीत परिस्थितियों में उन्होंने कभी अपनी सादगी और दृढ़ता नहीं छोड़ी.अपनी पैत्रक भूमि से सदैव जुड़े रहते हुए वे फैजाबाद में स्थाई रूप से अध्यात्मिक दिन चर्या के साथ जीवन गुजार रहे थे । गत ९ फरबरी २०१० को अपने फैजाबाद स्थित आवास पर सहकारिता के इस समर्पित सेनानी ने महा प्रयाण किया । नाती पोते पोतियों पुत्र एवं पुत्र वधुओं से भरे पूरे परिवार में उनकी जीवन शैली तथा आदर्शों की कहानियाँ रह गयी हैं .उनके अवसान के साथ ही सहकारिता की एक दैदीप्यमान ज्योति विलुप्त हो गयी।" सदियों बाद पैदा होता है एक महा पुरुष और दिखा जाता है हमें रोशनी की अनगिनत रहें।"

Saturday, February 13, 2010

shaadi ki teesavin Varshgaanth Mubaarak


सुख-दुःख मिश्रित इस जीवन की,

वो घड़ियाँ याद तुम्हें होगीं,

पीड़ा में सुख सुख में पीड़ा

अनवरत व्यथाएं भी भोगीं

ये तीन दशक- बीते टक-टक,

ये अंतरंगता आकर्षक

अविराम तृप्ति अनुभूति अमल,

ज्योतिर्मय जीवन सुख के पल

ये रहें सहोदर जीवन भर,

पल्लवित प्रेम यूँ रहे अमर

--प्रिय सुहृद राजीव और सुमन भाभी को ३०वी संनिध्यता की वर्षगाँठ मुबारक