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सुख-दुःख मिश्रित इस जीवन की,
वो घड़ियाँ याद तुम्हें होगीं,
पीड़ा में सुख सुख में पीड़ा
अनवरत व्यथाएं भी भोगीं
ये तीन दशक- बीते टक-टक,
ये अंतरंगता आकर्षक
अविराम तृप्ति अनुभूति अमल,
ज्योतिर्मय जीवन सुख के पल
ये रहें सहोदर जीवन भर,
पल्लवित प्रेम यूँ रहे अमर
--प्रिय सुहृद राजीव और सुमन भाभी को ३०वी संनिध्यता की वर्षगाँठ मुबारक
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