Monday, June 21, 2010

मेरे जन्म दिन का अर्थ !

मेरे जनम दिन का अर्थ
२२ जून २०१० जिसने एक ऐतिहासिक सच कि कल्पना की कि आज दो-दो सूरज धरती पर दिखाई देंगे। २१ जून का दिन तो भागोलिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है ही कि वो वर्ष का सबसे बड़ा दिन होता है लेकिन २२ जून इसलिये महत्वपूर्ण माना जायेगा कि आज दुनिया को दो- सूर्य दिखाई देंगे। मगर केवल उन्हें जो सूर्य कि लालिमा के चहेते हैं जिन्हें प्रकृति में सर्वश्व दिखाई देता है। मैं भी खुद को बड़ा भाग्यवान समझता था कि भागीरथ के पुण्य से गंगा के प्रथ्वी पर अवतरण कि शुभ बेला में मेरा जन्म हुआ सबसे बड़ा दिन कहा गया उसे लेकिन इस महान तिथि को जन्म लेने मात्र से कोई कैसे महान हो जायेगा ये बात अब मेरी समझ में कुछ- कुछ आने लगी और मैं अपनी इस जन्म तिथि से थोडा डरने लगा । प्रकृति में परवर्तन को उजागर करने वाले इस बड़े दिन पर जन्म लेने वाले भी इस दिन की तरह महान होंगे ये कैसे संभव हो सकता है। आज के दिन अपने पूर्वजों को मुक्ति दिलाने तथा लोक कल्याण के लिए भागीरथ के तप के परिणामस्वरुप शश्य श्यामला धरती को हरियाली देने का पुण्य तो हमें नहीं मिल सकता .घर में हमारे एक चाचा जी जो विगत छह माह से लकवे से ग्रस्त अपाहिज बने पड़े हैं ,ज़िन्दगी के नाम पर थोड़ी सी चेतना और बिस्तर पर जन्मे घावों की मर्मान्तक पीड़ा से कराहते कराहते बेजान होते अपनी बेचारगी और उस करुनामय की निष्ठुरता का अंतहीन सा संघर्ष - क्या इस भागीरथ के ऐतिहासिक दिन पर कोई चमत्कार कर उन्हें पीड़ा मुक्त करा सका ? क्या बेरोजगारी की मार झेलते लगातार प्राइवेट कंपनी में छोटी पगार से अच्छी पगार की उम्मीद लगाए अपने मामा की तरफ कुछ मदद चाहने वाले अपने भांजे के लिए कोई सहारा बन सका ? पड़ोस में रहने वाले अपने मित्र की विधवा के प्लाट पर ज़बरन कब्ज़ा करने वाले असामाजिक तत्वों से मुकाबला कर उनका प्लाट उन्हें दिला सके? अपने मित्रो के बेटे जो अच्छी नौकरी के लिए डिग्रियों का ढेर इकठा कर रहे हैं उन्हें कोई कायदे की सलाह देकर उनके दुःख दूर कर सके ? अपने ही बैंक में कोई ऐसा काम जिससे बैंक की तरक्की होती मैंने किया ? दुखों के सागर में डूबते उतराते हमारे आस-पास जिन्हें हम सहारा दे सकते थे क्या उन्हें मैंने कुछ दिया? इन सब का उत्तर केवल और केवल 'न' है। तब इस बड़े दिन पैदा होने का क्या अर्थ है? हाँ संत कबीर के इस बात को स्वीकारने की सामर्थ्य ज़रूर मिली है - '' बुरा जो देखन मैं चल्या बुरा न मिल्या कोय , जो मन खोजा आपनो तो मुझ सा बुरा न कोय .''

2 comments:

Ankit said...

अवधेश जी, जन्मदिन की ढेरों शुभकामनायें
आपका जन्मदिन मुझे याद था मगर स्वास्थ्य अच्छा ना होने के कारण दिमाग से उतर गया.
सच कहूं तो कल आसमान में दो सूरज और धरती पे एक सूरज जगमगा रहा था यानी आप, आप जिस उधेश्य की पूर्ती के निकले हैं वो अवश्य सफल होगा. अपने ऊपर टिप्पणी करना या अपनी कमी को दूसरों की कमी से पहले रखना महानुभाव का चरित्र होता है जैसा की आपने किया है.
मेरी ढेरों शुबकामनाएं आपके साथ है.

darshan said...

darshanprashant